Encyclopedia Of Jainism

जम्बूद्वीप, तेरहद्वीप एवं तीनलोक रचना (संक्षिप्त परिचय)

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हस्तिनापुर में निर्मित जम्बूद्वीप रचना में-
  1. सुदर्शनमेरु नाम से सुमेरु पर्वत एक है।
  2. अकृत्रिम ७८ जिनमंदिर में ७८ जिनप्रतिमाएँ हैं।
  3. १२३ देवभवनों में १२३ जिनप्रतिमाएं विराजमान हैं।
  4. श्रीसीमंधर आदि तीर्थंकर के ६ समवसरण हैं।
  5. हिमवान आदि ६ पर्वत हैं।
  6. भरत, हैमवत, हरि, विदेह आदि ७ क्षेत्र हैं।
  7.  पर्वतों के गोमुख से नीचे जटाजूट सहित १४
    जिनप्रतिमाएँ हैं।
हस्तिनापुर में निर्मित तेरहद्वीप रचना में-
  1.  ढाईद्वीप में पाँच मेरु पर्वत हैं।
  2. तेरहद्वीप तक ४५८ जिनमंदिर में ४५८ जिन-प्रतिमाएँ हैं।
  3. ८२१ देवभवनों में ८२१ जिनप्रतिमाएँ हैं।
  4. १७० कर्मभूमियों में  १७०समवसरण हैं।
  5. लवण समुद्र, कालोदधि समुद्र ये दो समुद्र हैं।
  6.  एक सिंहासन में १०८ जिनप्रतिमाएँ हैं।
  7.  एक सिंहासन पर श्रीसीमंधर आदि २० जिन-प्रतिमाएँ हैं।
  8. एक सिंहासन पर ऋषभदेव आदि २४ जिन- प्रतिमाएँ हैं।
  9. भरत क्षेत्र, ऐरावत क्षेत्र आदि के तीर्थंकरों की शांतिनाथ आदि १६ प्रतिमाएँ हैं।
  10. तीस भोगभूमि हैं। दोनों समुद्रों में कुभोगभूमि हैं।
  11. इस तेरहद्वीप रचना में २१२७ जिन प्रतिमाएँ विराजमान हैं।
तीनलोक रचना-
  1. तीनलोक में-अधोलोक, मध्यलोक और ऊध्र्वलोक ये तीन भेद हैं।

  2. अधोलोक में निगोद, नरक एवं देवों के स्थान हैं।

  3. असंख्यात द्वीप समुद्र हैं। इसी में मनुष्य एवं पशु, पक्षी, ज्योतिषी देव आदि हैं।

    जम्बूद्वीप, तेरहद्वीप एवं तीनलोक रचना (संक्षिप्त परिचय)

    -लेखिका- गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि

    श्री ज्ञानमती माताजी

तीनलोक रचना-
तीनलोक रचना-

इस ग्रन्थमाला में दिगम्बर जैन आर्षमार्ग का पोषण करने वाले हिन्दी, संस्कृत, प्राकृत, कन्नड़, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी आदि भाषाओं के न्याय, सिद्धान्त, अध्यात्म, भूगोल-खगोल, व्याकरण आदि विषयों पर लघु एवं वृहद् ग्रंथों का मूल एवं अनुवाद सहित प्रकाशन होता है। समय-समय पर धार्मिक लोकोपयोगी लघु पुस्तिकाएं भी प्रकाशित होती रहती हैं।