भगवान महावीर निर्वाणभूमि-पावापुरी जल मंदिर परिचय

पावापुरी में सरोवर के मध्य स्थितजल मंदिर ही भगवान महावीर की निर्वाणभूमि है। श्री पूज्यपाद आचार्य ने निर्वाणभक्ति में कहा है- पद्मवनदीर्घिकाकुल-विविधद्रुमखण्डमण्डिते रम्ये।पावानगरोद्याने व्युत्सर्गेण स्थितः स मुनिः।।१६।।कार्तिककृष्णस्यान्ते स्वातावृक्षे निहत्य कर्मरजः।अवशेषं संप्रापद्-व्यजरामरमक्षयं सौख्यम् ।।१७।।परिनिर्वृतं जिनेन्द्रं, ज्ञात्वा विबुधा ह्यथाशु चागम्य।देवतरुरक्तचंदन – कालागुरुसुरभिगोशीर्षैः ।।१८।।अग्नीन्द्राज्जिनदेहं मुकुटानलसुरभिधूपवरमाल्यैः।अभ्यच्र्य गणधरानपि, गता दिवं खं च वनभवने।।१९।। पुनश्च- पावापुरस्य बहिरुन्नतभूमिदेशे, पद्मोत्पलाकुलवतां सरसां हि मध्ये।श्रीवद्र्धमानजिनदेव […]

वीर निर्वाण संवत् सबसे प्राचीन!

विभिन्न धर्मों में अपने महापुरुषों के नाम से संवत् चलाने की परम्परा रही है। जैनधर्म में भी भगवान् महावीर की निर्वाण तिथि के आधार पर वीर निर्वाण संवत् का प्रचलन है। यह हिजरी, विक्रम, ईसवी, शक आदि सभी संवतों से अधिक  पुराना है एवं जैनधर्म की प्राचीनता व अपने मान्यता का उद्घोषक है । इस बात […]

जम्बूद्वीप, तेरहद्वीप एवं तीनलोक रचना (संक्षिप्त परिचय)

हस्तिनापुर में निर्मित जम्बूद्वीप रचना में- सुदर्शनमेरु नाम से सुमेरु पर्वत एक है। अकृत्रिम ७८ जिनमंदिर में ७८ जिनप्रतिमाएँ हैं। १२३ देवभवनों में १२३ जिनप्रतिमाएं विराजमान हैं। श्रीसीमंधर आदि तीर्थंकर के ६ समवसरण हैं। हिमवान आदि ६ पर्वत हैं। भरत, हैमवत, हरि, विदेह आदि ७ क्षेत्र हैं।  पर्वतों के गोमुख से नीचे जटाजूट सहित १४जिनप्रतिमाएँ […]