तेरहद्वीप मंदिर

JAMBUDWEEP से
Jainudai (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित २२:३३, ४ जून २०२० का अवतरण ('==<center><font color=#FF1493>'''अद्वितीय रचना: तेरहद्वीप जिनालय'''</font color>...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)
(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अद्वितीय रचना: तेरहद्वीप जिनालय

Qq608.jpg
जम्बूद्वीप तीर्थ पर अनूठी कृतियों का संगम अद्भुत प्रस्तुति के साथ अति विशिष्ट जिनमंदिरों के रूप में देखा जा सकता है। इन्हीं में एक है-तेरहद्वीप जिनालय।

जैन भूगोल के लगभग समग्र स्वरूप को प्रदर्शित करने वाली इस रचना का निर्माण होना पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी का एक दिव्य स्वप्न था, जो 27 अप्रैल से 2 मई 2007 के मध्य 5 दिनों तक आस्था चैनल पर सीधे प्रसारण के साथ सम्पन्न हुए भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सवपूर्वक साकार हुआ। इस रचना में भक्तों को मध्यलोक में स्थित 13 द्वीप के 458 अकृत्रिम जिनमंदिर, पंचमेरु पर्वत, 170 समवसरण, अनेक देवभवन आदि में विराजमान 2127 जिनप्रतिमाओं के दर्शन होते हैं। साथ ही विभिन्न सागर, नदी, पर्वत, भोगभूमि, कल्पवृक्ष आदि की अवस्थिति के संदर्भ में भी जानकारी प्राप्त होती है। यह रचना पूज्य माताजी द्वारा 2200 वर्ष प्राचीन तिलोयपण्णत्ति, त्रिलोकसार आदि ग्रंथों के गहन अध्ययन के आधार पर निर्मित कराई गई है। विश्व में प्रथम बार निर्मित इस अद्भुत रचना के दर्शन करके भक्तजन अपने मनोवांछित फल की प्राप्ति भी करते हैं।

तेरहद्वीपों के नाम-

  1. जम्बूद्वीप,
  2. धातकीखण्डद्वीप,
  3. पुष्करवरद्वीप,
  4. वारुणीवर द्वीप,
  5. क्षीरवर द्वीप
  6. घृतवर द्वीप,
  7. क्षौद्रवर द्वीप
  8. नंदीश्वर द्वीप,
  9. अरुणवर द्वीप,
  10. अरुणाभास द्वीप,
  11. कुण्डलवर द्वीप,
  12. शंखवर द्वीप
  13. रुचकवर द्वीप।