कमल मंदिर 







कमल मंदिर में विराजमान 

कल्पवृक्ष भगवान महावीर की 
अतिशयकारी, मनोहारी एवं अवगाहना प्रमाण 
सवा दस फुट ऊंची खडगासन प्रतिमा 
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                   सर्वप्रथम फरवरी सन 1975 में इस प्रतिमा की प्रतिष्ठा होने के बाद ही क्षेत्र का विकास प्रगति को प्राप्त हुआ और आज भी जम्बूद्वीप ही नहीं अपितु पूरे हस्तिनापुर में तीर्थ विकास के प्रशंसनीय कार्य तीव्रगति के साथ संपन्न हो रहे हैं | यहाँ भक्तगण छात्र चढ़ाकर अथवा दीपक जलाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं

जम्बूद्वीप तीर्थ पर निर्मित तीनलोक रचना

             जम्बूद्वीप तीर्थ पर विश्व में प्रथम बार निर्मित एक और रचना है, जिसे तीनलोक कहा जाता है | इस रचना में जैनधर्म के अनुसार अधोलोक, मध्यलोक एवं ऊर्ध्वलोक की अवस्थिति प्रदर्शित की गई है, जिसमें अधोलोक में भवनवासी, व्यंतर आदि देवों के भवन, जिनमंदिर तथा 7 नरक व वहां उपस्थित नारकियों की दशा, मध्यलोक में पंचमेरु पर्वत आदि तथा ऊर्ध्वालोक में 16 स्वर्ग व स्वर्ग में रहने वाले देवों का ऐश्वर्य, भव्य जिनमंदिर नवग्रैवेयक, नवअनुदिश, पंचअनुत्तर व सबसे ऊपर सिद्ध शिला आदि प्रदर्शित किए गए हैं | इस रचना में विराजमान की गई समस्त प्रतिमाएं पंचकल्याणकपूर्वक प्रतिष्ठित हैं। "अच्छे कार्यों से शुभ फलस्वरुप स्वर्ग व मोक्ष का वैभव एवं बुरे कार्यों के अशुभ फलस्वरुप नरक की वेदना", इस रचना के दर्शन से प्रत्येक जनमानस को यही संदेश प्राप्त होता है। विशेषता- इस रचना में लिफ्ट के द्वारा सेकेंडों में सिद्ध शिला तक पहुंचा जा सकता है।

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