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सन् 1974 से निरन्तर प्रकाशित हो रही मासिक पत्रिका 'सम्यग्ज्ञान'

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साहित्य केन्द्र (संस्थान द्वारा प्रकाशित लगभग 250 ग्रंथ विशेष छूट पर प्राप्त होते हैं)

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णमोकार महामंत्र बैंक

             पूज्य माताजी की प्रेरणा से सन् 1995 में स्थापित यह विशेष प्रकार का धार्मिक बैंक है, जिसमें देशभर के भक्तों द्वारा बैंक की योजना के अनुसार णमोकार महामंत्र का लेखन करके मंत्र की कॉपियाँ जमा करायी जाती है। यहाँ पर भक्तों द्वारा प्रेषित करोड़ों मंत्र जमा हो चुके हैं। बैंक क की योजनानुसार प्रत्येक वर्ष शरदपूर्णिमा के शुभ अवसर पर एक लाख बार णमोकार महामंत्र लिखने वाले महानुभावों को प्रमाणपत्र के साथ हीरक पदक, पचास हजार बार मंत्र लिखने वाले महानुभावों को स्वर्ण पदक एवं पच्चीस हजार मंत्र लिखने वाले महानुभावों को रजत पदक से सम्मानित किया जाता है।

संस्थान के स्वर्णिम इतिहास की एक झलक  राष्ट्रीय से अंतर्राष्ट्रीय

           जम्बूद्वीप परिसर में अनेकानेक निर्माणों के साथ-साथ इस संस्थान द्वारा संचालित सर्वतोमुखी कार्य सदैव राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर के रहे हैं। यहाँ स्थापित वीर ज्ञानोदय ग्रंथमाला के द्वारा दो सौ से अधिक ग्रंथों का लाखों की संख्या में प्रकाशन हुआ है तथा सन् 1974 से 'सम्यग्ज्ञान' मासिक पत्रिका का निरन्तर प्रकाशन चल रहा है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठाएं, संगोष्ठी, सेमिनार, सम्मेलन, शिक्षण प्रशिक्षण शिविर तो सन् 1975 से आयोजित होते रहे हैं, उनके अतिरिक्त पूज्य माताजी की प्रेरणा से समय-समय पर बहुत सारे प्रभावनात्मक कार्य इस संस्था ने किये हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख कार्यकलाप यहाँ प्रस्तुत हैं -

 

1. अक्टूबर मन् 1981 में जम्बूद्रीय हस्तिनापुर स्थल पर 'जम्बूद्वीप ज्ञान ज्योति सेमिनार' का आयोजन।

 

2. सन् 1982 से 1985 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा उद्घाटित 'जम्बूद्रीय ज्ञान ज्योति रथ' का भारत भ्रमण।

 

3. अप्रैल सन् 1985 में जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर स्थल पर 'जैन गणित और त्रिलोक विज्ञान' विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन।

 

4. सन् 1987 में जम्बूद्रीय के पीठाधीश एवं गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के प्रमुख शिष्यों में एक क्षुल्लक श्रीमतीसागर जी महाराज की जम्बूद्वीप स्थल पर क्षुल्लक दीक्षा।

 

5. सन् 1980 में जम्बूद्वीप स्थल पर पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की पथ-अनुगामिनी एवं आज्ञाकारी शिष्या माधुरी जैन की आर्थिका दीक्षा।

 

6. सन् 1992 में जम्बद्वीप हस्तिनापुर में 'अंतर्राज्यीय चरित्र निर्माण संगोष्ठी का आयोजन'।

 

7. सन 1993 में संस्थान द्वारा अयोध्या में 'भारतीय संस्कृति के आद्यप्रणेता भगवान ऋषभदेव विषय' पर संगोष्ठी का आयोजन। 

 

8. अक्टूबर सन् 1995 में जम्बूद्वीप हस्तिनापुर में 'गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती साहित्य संगोष्ठी' का आयोजन।

 

9. अक्टूबर 1997 में 4 से 13 अक्टूबर तक राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा द्वारा उद्घाटित 'चौबीस कल्पद्रुम महामण्डल विधान का ऐतिहासिक आयोजन।

 

10. मार्च-अप्रैल 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा तालकटोरा स्टेडियम-दिल्ली से 'भगवान ऋषभदेव समवसरण श्रीविहार' रथ का भारत भ्रमण हेतु उद्घाटन।

 

11. अक्टूबर 1998 में जम्बूद्वीप हस्तिनापुर में 'राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन' का आयोजन।

 

12. फरवरी 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा लालकिला मैदान दिल्ली में 'भगवान ऋषभदेव अंतर्राष्ट्रीय महामहोत्सव वर्ष का उद्घाटन।

 

13. जून 2000 में जम्बूद्वीप हस्तिनापुर में 'जैनधर्म की प्राचीनता' विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन।

 

14. सन् 2000 में यू. एन. ओ. न्यूयार्क (यू.एस.ए.) में आयोजित 'विश्वशांति शिखर सम्मेलन' में जम्बूद्वीप हस्तिनापुर की ओर से संस्थान के अध्यक्ष कर्मयोगी रवीन्द्र कुमार जैन द्वारा धर्माचार्य के रूप में प्रतिनिधित्व।

 

15 फरवरी 2001 में प्रथम तीर्थकर भगवान ऋषभदेव की दीक्षा एवं केवलज्ञान भूमि प्रयाग इलाहाबाद में 'तीर्थंकर ऋषभदेव तपस्थली तीर्थ' का ऐतिहासिक नवनिर्माण।

 

16 सन् 2003-2004 में भगवान महावीर जन्मभूमि कुण्डलपुर (नालंदा) बिहार में नद्यावर्त महल तीर्थ का भव्य निर्माण एवं 'भगवान महावीर ज्योति रथ' का भारत भ्रमण हेतु प्रवर्तन।

 

17. सन् 2005-2007 में भगवान पार्श्वनाथ जन्मकल्याणक तृतीय सहस्राब्दि महोत्सव' का 6 जनवरी 2005 को बनारस में उद्घाटन एवं 4 जनवरी 2008 को अहिच्छत्र में समापन।

 

18. सन् 2008 में 21 दिसम्बर को जम्बूद्वीप स्थल पर पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल द्वारा 'विश्वशांति अहिंसा सम्मेलन' का उद्घाटन।

 

19. अगस्त सन् 2009 में संसद भवन-दिल्ली में गृहमंत्री श्री प्रणव मुखर्जी द्वारा उद्घाटित "श्री जे. के. जैन अभिनंदन समारोह"  का आयोजन। 

 

20. फरवरी सन् 2010 में जम्बूद्रीय स्थल पर 'जम्बूद्वीप रजत जयंती महोत्सव' के साथ भगवान शांतिनाथ-कुंथुनाथ-अरहनाथ की 31-31 फुट उत्तुंग विशाल खड़गासन प्रतिमाओं का 'अंतर्राष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं तीर्थकरत्रय महामस्तकाभिषेक महोत्सव' तथा परिसर में नवनिर्मित तीनलोक रचना' का भव्य उद्घाटन समारोह।