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जम्बूद्रीय तीर्थ पर विराजमान 31-31 फुट उत्तुंग भगवान शांतिनाथ-कुंथुनाथ-अरहनाथ की विशाल खड्गासन प्रतिमाएँ

 

तीन विशाल प्रतिमाओं की स्थापना

 

'जम्बूद्वीप तीर्थ के इतिहास का एक स्वर्णिम पृष्ठ'

 

           तीर्थकर जन्मभूमियों के इतिहास में यह प्रथम अवसर था, जब भगवान शांतिनाथ-कुंथुनाथ-अरहनाथ जैसे तीन-तीन पद के धारी महान तीर्थंकरों की साक्षात् जन्मभूमि हस्तिनापुर में जम्बूद्वीप स्थल पर ग्रेनाइट पाषाण की 31-31 फुट उत्तुंग तीन विशाल प्रतिमाएं अत्यन्त मनोरम मुद्राकृति में निर्मित करके राष्ट्रीय स्तर के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ विराजमान की गई। 11 फरवरी से 21 फरवरी 2010 तक यह आयोजन भव्यतापूर्वक सम्पन्न हुआ, जिसमें देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य अर्जित किया। समापन के तीन दिवसों में तीनों भगवन्तों का ऐतिहासिक महामस्तकाभिषेक महोत्सव भी सम्पन्न हुआ।

हस्तिनापुर की प्राचीनता

 

 

           भारत एक अद्भुत धनाढ्य देश है क्योंकि यहाँ सदैव आध्यात्मिक महापुरुषों ने जन्म लेकर अपनी त्याग, तपस्या एवं साहित्य लेखन आदि के द्वारा अमूल्य निधियाँ विश्व को प्रदान की है। इसे हम दूसरे शब्दों में ऐसे भी कह सकते हैं कि-India is the cradle of greatmen, यहाँ अयोध्या, हस्तिनापुर, बनारस, उज्जैन आदि अनेक पवित्र नगरियाँ है रे आज से कोड़ाकोड़ी वर्ष पूर्व इन्द्र ने बसाया था।  भगवान ऋऋषभदेव के प्रथम पुत्र, प्रथम चक्रवर्ती भरत के नाम पर ही देश का नाम 'भारतवर्ष' पड़ा है, ऐसा प्राचीन इतिहास एवं वेदपुराणों के माध्यम से ज्ञात होता है।

 

           जैनधर्म के 24 तीर्थंकरों में से 16-17-18वें तीर्थकर श्री शांतिनाथ, कुंथुनाथ, अरहनाथ का जन्म हस्तिनापुर में हुआ था। करोड़ों वर्ष पूर्व यहाँ पर तीर्थकरों के चार-चार कल्याणक हुए थे और तीर्थकर चक्रवर्ती, कामदेव इन तीन पदों के धारक इन तीनों महापुरुषों ने हस्तिनापुर को राजधानी बनाकर यहाँ से छह खण्ड का राज्य संचालित किया था। आज से लगभग 86500 वर्ष पूर्व महाभारत काल में भी हस्तिनापुर नगरी भारत की राजधानी मानी जाती थी। तब दिल्ली और हस्तिनापुर को संभवतः एक ही माना जाता था। जैसा कि पं. जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पुस्तक The Discovery of India के पृष्ठ 107 पर लिखा है-Dilli or Delhi, not the modern city but ancient cities situated near the modern site, named Hastinapur and Indraprastha becomes the metropolis of India: इससे स्पष्ट ज्ञात होता है कि आज जिसे हम दिल्ली नाम से जानते हैं वह कभी हस्तिनापुर एवं इन्द्रप्रस्थ कहलाता था अतः दिल्ली और हस्तिनापुर को एक दूसरे के पूरक हो समझना चाहिए।