अद्वितीय रचना : तेरहद्वीप जिनालय

गणिनी ज्ञानमती

हीरक जयन्ती एक्सप्रेस

'तीर्थंकर जन्मभूमि यात्रा'

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24 तीर्थंकरों भगवंतों की जन्मभूमियों के संदर्भ में जानकारी प्रस्तुत करने हेतु जंबूद्वीप हस्तिनापुर में गणिनी ज्ञानमती हीरक जयंती एक्सप्रेस तीर्थंकर जन्मभूमि यात्रा नामक रेल का निर्माण किया गया है। पूज्य गणिनी माता जी की 70 वी जन्म जयंती 14 अक्टूबर 2008 के अवसर पर आयोजित हीरक जयंती महोत्सव में उद्घाटित इस रेल की एक बोगी में आकर्षक पेंटिंग द्वारा तीर्थंकर जन्मभूमियों के तत्कालीन वास्तविक स्वरूप तथा वर्तमान स्थिति को प्रकाशित किया गया है। इस के अवलोकन से भक्तों में तीर्थंकर जन्मभूमियों की यात्रा एवं उनके विकास के प्रति जागृति आ रही है। ज्ञातव्य है कि गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से अभी तक 12 तीर्थंकर जन्मभूमियों का विकास हो चुका है, जिनमें हस्तिनापुर, अयोध्या, कुंडलपुर (नालंदा), काकन्दी- गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), राजगृही (नालंदा) तथा सारनाथ (वाराणसी) शामिल हैं। आगे भी तीर्थंकर जन्मभूमियों के विकास कार्य हेतु समिति प्रयासरत है। इस एक्सप्रेस रेल की दूसरी बोगी में जंबूद्वीप थिएटर का निर्माण किया गया है, जिसमें यात्रियों के लिए विभिन्न धार्मिक फिल्म तथा भजन आदि के माध्यम से ज्ञानवर्धक संदेश प्रस्तुत किया जाता है। 

             जम्बूद्वीप तीर्थ पर अनूठी कृतियों का संगम अद्भुत प्रस्तुति के साथ अति विशिष्ट जिन मंदिरों के रूप में देखा जा सकता है। इन्हीं में से एक है -तेरहद्वीप जिनालय। 

             जैन भूगोल के लगभग समग्र स्वरूप को प्रदर्शित करने वाली इस रचना का निर्माण होना पूज्य गणिनी ज्ञानमाती माताजी का एक दिव्य स्वप्न था, जो 27 अप्रैल से 2 मई 2007 के मध्य 5 दिनों तक आस्था चैनल पर सीधे प्रसारण के साथ संपन्न हुए भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव पूर्वक साकार हुआ। इस रचना में भक्तों को मध्यलोक में स्थित तेरहद्वीप के 458 अकृतिम जिन मंदिर, पंचमेरु पर्वत, 170 समवसरण, अनेक देवभवन आदि में विराजमान 2127 जिन प्रतिमाओं के दर्शन होते हैं। साथ ही विभिन्न सागर, नदी, पर्वत, भोगभूमि, कल्पवृक्ष आदि की अवस्थिति के संदर्भ में भी जानकारी प्राप्त होती है। यह रचना पूज्य माता जी द्वारा 2200 वर्ष प्राचीन तिलोयपण्णत्ति, त्रिलोकसार आदि ग्रंथों के गहन अध्ययन के आधार पर निर्मित कराई गई है। विश्व में प्रथम बार निर्मित इस अद्भुत रचना के दर्शन करके भक्तजन अपने मनोवांछित फल की प्राप्ति भी करते हैं | 

              तेरहद्वीपों के नाम - 1. जंबूद्वीप, 2. धातकीखण्डद्वीप, 3. पुष्करवरद्वीप, 4. वारुणीवर द्वीप, 5. क्षीरवरद्वीप, 6.धृतवरद्वीप, 7. क्षौद्रवरद्वीप, 8. नंदीश्वरद्वीप, 9. अरुणवरद्वीप, 10. अरुणाभासद्वीप, 11. कुंडलवरद्वीप, 12. शंखवरद्वीप  एवं 13. रुचकवरद्वीप | इसमें प्रत्येक द्वीप को घेरकर दूने-दूने विस्तार वाले लवण, कालोदधि आदि समुद्र भी हैं। 

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