जम्बूद्वीप स्थल पर यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाएँ

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ए.सी. आदि सर्वसुविधा से युक्त कोठियाँ

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डीलक्स फ्लैटस की सुन्दर धर्मशाला

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राजा श्रेयांस भोजनालय

(500 यात्रियों के एक साथ भोजन व्यवस्था की क्षमता से युक्त)

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सुन्दर भव्य बंगले

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कोठियों का अंतरंग दृश्य

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ड्राइंग रूम 

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बंगले में निर्मित ए.सी. बेडरूम

यात्री सुविधा

           हस्तिनापुर तीर्थ में जम्बूद्वीप स्थल के पूरे परिसर में संस्थान द्वारा कार्यालय का सक्रिय संचालन किया जाता है। वहाँ यात्रियों के ठहरने हेतु आधुनिक सुविधायुक्त 200 कमरे 50 से अधिक डीलक्स फ्लैट एवं अनेकों गेस्टहाउस (बंगले) बने हुए हैं। इसके साथ ही यहाँ निःशुल्क भोजनालय है जहाँ यात्रियों को सुविधापूर्वक शुद्ध भोजन प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त 2 किमी. दूर हस्तिनापुर सेन्ट्रल टाउन में सरकारी अस्पताल, डाकखाना, बाजार, इंटरकालेज तथा अन्य शिक्षण संस्थाएं आदि सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध है।


हस्तिनापुर कैसे पहुँचे ?

          राजधानी दिल्ली में 110 किमी. पश्चिमी उत्तरप्रदेश में जिला-मेरठ से 40 किमी दूर हस्तिनापुर तीर्थ है। राजधानी दिल्ली से हस्तिनापुर के लिए अंतर्राज्यीय बस अड्डे अथवा आनंद विहार बस अड्डे से उत्तरप्रदेश रोडवेज तथा डी.टी. बसों की निरंतर सेवा उपलब्ध है। मेरठ से भी प्रति आधे घंटे के अंतराल से जम्बूद्वीप हस्तिनापुर पहुंचने हेतु रोडवेज की बसे सुलभता के साथ उपलब्ध रहती है। 'जम्बूद्वीप' के नाम से ये बसें चलती हैं जो सीधे जम्बूद्रीय के सामने ही रुकती है और जम्बूद्वीप से ही मेरठ, दिल्ली, तिजारा आदि यात्रा हेतु बसे उपलब्ध रहती हैं। दिल्ली और मेरठ के बीच रेल सेवा भी है। देश-विदेश के गण हस्तिनापुर पधारकर इस धरती का स्वर्ग मानी जाने वाली 'जम्बूद्वीप रचना' के दर्शन करें और मानसिक शांति का अनुभव करते हुए मनवांछित फल प्राप्त करें, यही मंगलकामना है।

         कहते हैं कि सन् 1948 में स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने हस्तिनापुर सेन्ट्रल टाउन की पुनस्थापना की थी। वहाँ से पूर्व दिशा में 2 किमी. जाकर मीरापुर रोड से आई ओर मुड़ने पर जैन तीर्थ का परिसर प्रारंभ होता है। जहाँ दिगम्बर श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन समाज की संस्थाएं अपने-अपने मंदिर परिसरों में विभिन्न गतिविधियों का संचालन करती हैं। ऊंचे टीले पर निर्मित लगभग 200 वर्ष पुराना दिगम्बर जैन मंदिर यहाँ का सबसे प्राचीन मंदिर है। वर्तमान में इस संस्था के द्वारा भी नंदीश्वर द्वीप समवसरण एवं कैलाशपर्वत आदि अनेक मंदिरों का निर्माण कर यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। प्राचीन मंदिर से ही आधा फलांग आगे नसिया मार्ग पर 'जम्बूद्वीप' नामक तीर्थ है।



तीर्थकर जन्मभूमि विकास

         पूज्य माताजी की प्रेरणा से हस्तिनापुर का यह संस्थान तीर्थकर जन्मभूमि विकास समिति के माध्यम से 24 तीर्थकर भगवन्तों की 16 जन्मभूमि तीर्थों के विकास का कार्य कर रहा है। वर्तमान में 9वें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंतनाथ की जन्मभूमि ककंदी (निकट गोरखपुर-उ.प्र.) तथा अयोध्या में भगवान ऋषभदेव की वास्तविक जन्मभूमि प्रथम टॉक का विकासकार्य किया गया है। आगे भी तीर्थकर जन्मभूमियों के विकास हेतु समिति प्रयासरत है।