"ध्यान मंदिर" के अवतरणों में अंतर

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यह ध्यान मंदिर के बहार का दृश्य है | यह दृश्य देखते ही मन को आकर्षित करती है की यह मंदिर में मंदिर के बाहर ऊपर की और खास क्यों लगी है ? मंदिर की सुंदरता देने के लिए यहाँ पर खास लगाई गयी है जो की एक अनोखी कला बनाई गयी है हरियाली का प्रतीक भी है की बाहर से ही इतना आकर्षित कर रहा है तो अंदर तो और सुंदर वातावरण होगा जिससे ध्यान में मन लगेगा | </font>
  
  
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ध्यान मंदिर में विराजमान 24 तीर्थंकरों से संयुक्त 'ह्रींँ' बीजाक्षर की प्रतिमा |  यह मंदिर ध्यान के लिए अलग से इसलिए बनाया है क्योकि कहा जाता है एकांत में ही ध्यान हो सकता है और कहा भी गया है 10 मिनट अपनी आत्मा को दो क्योकि जब तक आप अपने को नहीं जानोगे तब तक आप परमात्मा से कैसे मिल पाओगे ? इसलिए आप 10 मिनट ही सही लेकिन प्रभु का ध्यान जरूरी है यही ध्यान से आप स्वस्थ भी रहेंगे और 10 मिनट ही सही आप संसार से हटकर अपनी आत्मा को जानेगे और समझेंगे | ध्यान से ही आप अपने मन को भी स्थिर कर पाएगे और एक दिन नहीं दो दिन नहीं जब बार-बार यह प्रयास आप दैनिक दिन चर्या में ली आएंगे तो एक दिन आप अपने को समझ जाएगे की आत्मा भिन्न है शरीर भिन्न है | और ये चौबीस तीर्थंकर की प्रतिमा भी आप अपने मन में बना लीजिए तब जैसे ही ध्यान करेंगे तो तुरंत ही वह फोटो बनकर के आपको वही ध्यान में पंहुचा देगी   
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१४:४६, १७ जून २०२० का अवतरण

ध्यान मंदिर

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यह ध्यान मंदिर के बहार का दृश्य है | यह दृश्य देखते ही मन को आकर्षित करती है की यह मंदिर में मंदिर के बाहर ऊपर की और खास क्यों लगी है ? मंदिर की सुंदरता देने के लिए यहाँ पर खास लगाई गयी है जो की एक अनोखी कला बनाई गयी है हरियाली का प्रतीक भी है की बाहर से ही इतना आकर्षित कर रहा है तो अंदर तो और सुंदर वातावरण होगा जिससे ध्यान में मन लगेगा |



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ध्यान मंदिर में विराजमान 24 तीर्थंकरों से संयुक्त 'ह्रींँ' बीजाक्षर की प्रतिमा | यह मंदिर ध्यान के लिए अलग से इसलिए बनाया है क्योकि कहा जाता है एकांत में ही ध्यान हो सकता है और कहा भी गया है 10 मिनट अपनी आत्मा को दो क्योकि जब तक आप अपने को नहीं जानोगे तब तक आप परमात्मा से कैसे मिल पाओगे ? इसलिए आप 10 मिनट ही सही लेकिन प्रभु का ध्यान जरूरी है यही ध्यान से आप स्वस्थ भी रहेंगे और 10 मिनट ही सही आप संसार से हटकर अपनी आत्मा को जानेगे और समझेंगे | ध्यान से ही आप अपने मन को भी स्थिर कर पाएगे और एक दिन नहीं दो दिन नहीं जब बार-बार यह प्रयास आप दैनिक दिन चर्या में ली आएंगे तो एक दिन आप अपने को समझ जाएगे की आत्मा भिन्न है शरीर भिन्न है | और ये चौबीस तीर्थंकर की प्रतिमा भी आप अपने मन में बना लीजिए तब जैसे ही ध्यान करेंगे तो तुरंत ही वह फोटो बनकर के आपको वही ध्यान में पंहुचा देगी