गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती दिगम्बर जैन पत्राचार परीक्षा केन्द्र

ज्ञानपिपासु महानुभावों! आपको जानकर प्रसन्नता होगी कि वर्तमान बीसवी-इक्कीसवीं शताब्दी की सर्व प्राचीन दीक्षित एवं ज्ञान के क्षेत्र में जिन्हें जैनधर्म का जीवन्त इन्साइक्लोपीडिया कहा जा सकता है, ऐसी परमपूज्य, ६० वर्षीय दीक्षित जीवन की महातपस्विनी साध्वी युगप्रवर्तिका, चारित्रचन्द्रिका, गणिनीप्रमुख, आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी नाम से जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर संस्थान द्वारा ‘‘गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती दिगम्बर जैन पत्राचार परीक्षा केन्द्र’’ का शुभारंभ वर्ष-२०१२ से किया जा रहा है। इस परीक्षा केन्द्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जैन श्रावक-श्राविकाओं को धर्म के ज्ञान से अभिसिंचित करना एवं उन्हें समाज में लब्ध प्रतिष्ठित करने हेतु विशेष डिग्री के माध्यम से सम्मानित करना है। इस परीक्षा केन्द्र के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के डिग्री कोर्स का शुभारंभ किया जा रहा है, जिसे १२ वर्ष से अधिक उम्र के श्रावक-श्राविकाएँ ज्ञानाराधना के लिए ज्वाइन कर सकते हैं। पूज्य माताजी का यह मार्मिक चिंतन है कि जैनधर्म के बंधुओं को सांसारिक व लौकिक ज्ञान के साथ ही जैनधर्म का ज्ञान अवश्यरूप से होना चाहिए, क्योंकि जैनधर्म के सिद्धान्तों को जानकर ही हमारी आत्मा विशुद्धि को प्राप्त करती है एवं धर्म के ये संस्कार आगामी अनेक भवों तक प्रत्येक आत्मा का मोक्षमार्ग प्रशस्त करते हुए उन्हें संसार भ्रमण से दूर करने में सहयोगी बनते हैं। ‘‘ज्ञानामृतंं भोजनं’’ इस सूक्ति के अनुसार ज्ञानरूपी अमृत ही आत्मा का भोजन है अत: संसार में मनुष्य जन्म एवं जैन कुल प्राप्त करने के उपरांत प्रत्येक जैनधर्मी अपनी आत्मा को ज्ञानरूपी अमृत से अभिसिंचित करे, यही इस परीक्षा केन्द्र का अत्यन्त गूढ़ एवं मूल उद्देश्य है। आशा है आप सभी इस परीक्षा कोर्स में अभिरुचि के साथ भाग लेकर जैनधर्म के ‘‘सिद्धान्त, न्याय, व्याकरण, साहित्य व विधिविधान’’ से संदर्भित ज्ञान को प्राप्त करते हुए न सिर्फ अपनी आत्मा को विशुद्ध करेंगे अपितु समाज में भी विशेष प्रतिष्ठा एवं प्रसिद्धि को प्राप्त करके जैनधर्म की महती प्रभावना के साथ अपनी यशकीर्ति को दिग्दिगंतव्यापी बनायेंगे।


(१) परीक्षा केन्द्र द्वारा यह धार्मिक परीक्षा प्रणाली ‘‘पत्राचार कोर्स’’ के रूप में प्रारंभ की गई है।

(२) किसी भी कोर्स में भाग लेने हेतु प्रवेश ‘नि:शुल्क’ रखा गया है।

(३) परीक्षा में भाग लेने के लिए उम्र सीमा १२ वर्ष से अधिक रखी गई है। जैनधर्म के ज्ञान का अर्जन करने के इच्छुक प्रत्येक श्रावक-श्राविकाएँ इसमें भाग ले सकते हैं।

(४) समस्त परीक्षाएँ पत्राचार के माध्यम से घर बैठे दी जा सकती हैं।

(५) परीक्षा में प्रवेश पाने हेतु वर्ष के जनवरी माह के अंतिम सप्ताह तक प्रवेश फार्म भरकर परीक्षार्थी को जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर के पते पर आवश्यक रूप से पहुँचाना होगा।

(६) प्रवेश फार्म भरने के उपरांत आपको संस्थान द्वारा रोल नम्बर आदि के साथ विशेष प्रवेश-पत्र भेजा जायेगा, जिसे परीक्षा तक संभालकर रखना होगा।

(७) परीक्षा के प्रश्न-पत्र जून के अंतिम सप्ताह में संस्थान द्वारा डाक से आपके घर पहुँचाये जायेंगे।

(८) प्रश्नपत्र में उत्तर लिखने के उपरांत १५ जुलाई तक आपको उत्तर-पुस्तिका जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर के कार्यालय पर रजिस्टर्ड डाक द्वारा पहुँचाना अनिवार्य रहेगा।

(९) उत्तर पुस्तिका की जाँच जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर के विद्वानों द्वारा की जायेगी और प्रमाण-पत्र के माध्यम से आपको परिणाम फल पहुँचाया जायेगा।

(१०) यह परीक्षा केन्द्र जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी परमपूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी के नाम पर खोला गया है, जिसमें प्रवेश लेने वाले परीक्षार्थियों को पूज्य माताजी का विशेष मंगल आशीर्वाद प्राप्त रहेगा।

इस परीक्षा केन्द्र का संचालन प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी के विशेष मार्गदर्शन एवं जम्बूद्वीप धर्मपीठ के पीठाधीश कर्मयोगी स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी जी के निर्देशन में होगा।