अवश्य पढ़ने योग्य नियमावली

-कोर्स से संबंधित सामान्य जानकारी-

(१) इस परीक्षा केन्द्र द्वारा चार प्रकार के ‘‘डिग्री कोर्स’’ संचालित किए जा रहे हैं-(१) प्रवेशिका,(२) विशारद, (३) शास्त्री, (४) आचार्य।

(२) ‘‘प्रवेशिका’’, ‘‘विशारद’’ व ‘‘शास्त्री’’, इन तीन डिग्री कोर्स को ‘प्रथम खण्ड’, ‘द्वितीय खण्ड’ व ‘तृतीय खण्ड’, इस प्रकार तीन भागों में बांटा गया है। प्रत्येक खण्ड की कोर्स- अवधि एक-एक वर्ष रखी गई है। इस प्रकार तीनों डिग्री के सम्पूर्ण कोर्स पृथक्-पृथक् तीन-तीन वर्ष के रखे गये हैं।

(३) ‘‘आचार्य’’ डिग्री कोर्स को केवल ‘प्रथम खण्ड’ व ‘द्वितीय खण्ड’ इस प्रकार दो भागों में बांटा गया है। अत: आचार्य डिग्री की कोर्स-अवधि कुल दो वर्ष रखी गई है।

(४) यदि कोई परीक्षार्थी स्वयं को किसी भी डिग्री कोर्स के समस्त खण्डों की परीक्षाएं एक ही वर्ष में देने के योग्य समझता है, तो परीक्षा केन्द्र द्वारा उसे एक वर्ष में ही किसी भी डिग्री कोर्स के प्रत्येक खण्ड की परीक्षा देने की अनुमति रहेगी। अर्थात् किसी भी डिग्री कोर्स के समस्त खण्डों की परीक्षाएं एक वर्ष में एक साथ भी दी जा सकती हैं।

(५) प्राथमिक रूप से कोई भी श्रावक-श्राविका ‘‘प्रवेशिका डिग्री कोर्स’’ में एडमिशन ले सकता है। लेकिन यदि कोई परीक्षार्थी सीधे ‘विशारद’ या ‘शास्त्री’ या ‘आचार्य’ की परीक्षा में भाग लेना चाहता है, तो ‘विशारद’ करने वाले को नियमानुसार मौखिक या लिखित ‘प्रवेशिका’ का टेस्ट केन्द्र द्वारा निर्धारित तिथि पर देना होगा, ‘शास्त्री’ करने वाले को ‘विशारद’ का टेस्ट तथा ‘आचार्य’ करने वाले को ‘शास्त्री’ का टेस्ट देना होगा। टेस्ट में उत्तीर्णता पर ही इच्छित कोर्स में भाग लेने की अनुमति होगी।

(६) उपरोक्त चारों प्रकार के डिग्री कोर्स में-(१) सिद्धान्त (धर्म), (२) न्याय, (३) व्याकरण, (४) साहित्य, (५) विधिविधान (पूजानुष्ठान), ये पाँच विषय रखे गये हैं। परीक्षार्थीगण इन पाँचों विषयों की परीक्षा दे सकते हैं। अन्यथा यदि परिक्षार्थी चाहें तो ‘सिद्धान्त (धर्म)’ विषय की अनिवार्यता के साथ शेष बचे चार विषयों-‘न्याय, व्याकरण, साहित्य एवं विधिविधान’ में से कोई भी दो विषय अपनी रुचिनुसार चयनित करके भी परीक्षा दे सकते हैं। अर्थात् प्रत्येक डिग्री कोर्स की परीक्षा में परीक्षार्थी को कम से कम तीन विषयों की परीक्षा देना आवश्यक होगा।

(७) प्रत्येक डिग्री कोर्स की परीक्षा कुल ५०० अंक की होगी। अर्थात् पाँचों विषयों के परीक्षा पत्र १००-१०० अंक के होंगे। यदि परीक्षार्थी द्वारा अनिवार्य विषय के साथ अन्य दो विषय चयनित कर तीन विषयों के लिए आवेदन किया गया है, तो उसका परिणामफल कुल ३०० अंकों के आधार पर निकाला जायेगा।

(८) यदि आप किसी भी एक विषय की परीक्षा देंगे, तो आपको प्रमाण-पत्र एक विषय का ही प्रदान किया जायेगा और यदि आप सम्पूर्ण कोर्स जैसे-‘प्रवेशिका (प्रथम खण्ड)’ आदि की परीक्षा देंगे, तो आपको ‘‘प्रवेशिका’’ आदि डिग्री का प्रमाण-पत्र भेजा जायेगा।

(९) विशेष ध्यान देना है कि जिन विषयों में परीक्षार्थीगण विशारद व शास्त्री परीक्षा को उत्तीर्ण कर चुके हैं, उन्हीं विषयों में यदि कोई परीक्षार्थी आचार्य की परीक्षा भी उत्तीर्ण करता है, तो आचार्य परीक्षा के द्वितीय खण्ड में जिस किसी विषय में परीक्षार्थी को सर्वाधिक अंक प्राप्त होंगे, उसके अनुरूप परीक्षार्थी को विशेष उपाधि भी प्रदान की जायेगी। जैसे-सिद्धान्त विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले को ‘‘सिद्धान्ताचार्य’’, न्याय विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले को ‘‘न्यायाचार्य’’, व्याकरण विषय में ‘‘व्याकरणाचार्य’’,साहित्य विषय में ‘‘साहित्याचार्य’’ व विधि-विधान विषय में ‘‘प्रतिष्ठाचार्य’’ की उपाधि प्रदान की जायेगी।

(१०) किसी भी विषय अथवा डिग्री कोर्स की परीक्षा का उत्तीर्णांक ३३ प्रतिशत रखा गया है।

(११) परीक्षा में पेâल होने पर उत्तर पुस्तिका की पुन: जाँच हेतु कोई व्यवस्था नहीं रखी गई है। परीक्षार्थी को दोबारा ही परीक्षा देना होगी।

(१२) परीक्षा के प्रश्नपत्रों में आब्जेक्टिव एवं सब्जेक्टिव (थ्योरीटिकल) प्रश्न पूछे जायेंगे।

(१३) परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर द्वारा निर्धारित कोर्स बुक के आधार पर ही लिखना अनिवार्य होगा। अन्यथा ‘०’ मार्विंâग की जा सकती है।

(१४) कोर्स से संबंधित किताबें जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर से ५० प्रतिशत की विशेष छूट पर मंगवाई जा सकती हैं।

(१५) विशेष जानकारी हेतु परीक्षा केन्द्र के प्रधान कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

-महत्वपूर्ण नोट -

घर बैठे परीक्षा हेतु वर्ष भर नियमित अध्ययन अवश्य करें एवं किये गये स्वाध्याय व अध्ययन के परीक्षण हेतु परीक्षा के समय स्वत: की ईमानदारी के साथ बिना पुस्तकों को देखे उत्तर लिखने का प्रयास करें, जिससे कि यथार्थस्वरूप में धर्म के प्रति आपकी विद्वत्ता का परीक्षण होकर आपके हाथों में सही परिणामफल प्राप्त हो सके।

-प्रवेश फार्म के लिए संपर्क करें-

दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान

जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर (मेरठ) उ.प्र.-250404 फोन नं.-(01233) 280184, 280994
Website : www.jambudweep.org E-mail : This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.